अब भी याद करता हूं मै जब उसकी बातें ,दिल में चुभन ही बस साथ देती है ।
खो जाता हूं जब उसकी यादों मै , तो मेरी तन्हाइयां ही मुझे आवाज देती है।
बहुत अच्छा है मंजर अब ,तन्हाइयो का है खुद का समंदर अब।
यूं तन्हाई में तेरे बिन ,जिए जा रहे हम ।
जिंदगी से अब ना कोई शिकवा रहा ,खुद को ही रास्ता दिखाएं जा रहे है हम ।
तेरे जाने के बाद सब भूल गए ,बस यूं समझ ले की कोरे कागज पे लकीर बनाए जा रहे है हम।
©aaryansing
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