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💔💔💔💔

जब इंतेज़ार की भी इन्तेहाँ हो जाये
फितूर हद से बढ़ जाये
किसकी यादों में शब ढल जाए
हिज़्र हद से गुज़र जाए
कोई कह कर भी न आये
उदासी फिर क्यों न छाए
कोई उसे भी तो समझाये
यूँ न हमें सताए.....
©deeprichu