लौट आओ ना
कि तुम बिन सूना है
घर का आंगन
लौट आओ ना
कि तुम बिन सूना है
सपनो का दामन
लौट आओ ना
कि तुम बिन
तन्हाई में जलते है
लौट आओ ना
कि तुम बिन दिन
गिनते रहते है
लौट आओ ना
कि तुम बिन
सूनी है राहें
लौट आओ ना
कि तड़पती
बुलाती है बाहें
लौट आओ ना
कि अब देर हो रही है
लौट आओ ना
कि अब कमी खल रही है
लौट आओ ना....
©aaryansing
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