M mannjaisy en July 23, 2025 📖 भटकती आँखों से ख़्वाब देखे हैं।आब के बुलबुलों मे इन्क़लाब देखे हैं।खुद के वजूद की ख़बर नहीं साहबचमन के काँटों मे भी गुलाब देखै हैं।©mannjaisy