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" प्राण प्रतिष्ठा "

मंदिर बनने को कई मन अधीर थे..
जिनमे कोई संत कोई पंत ,
तो कई कबीर थे ..
नैनो में प्रेम लिए इरादों से गम्भीर थे..
भीतर से "राम "नाम में लीन ,
बाहर से केवल शरीर थे ..
उन्हीं की ऊर्जाओं से आज
कण - कण, ने राम नाम को बोया है
ईश्वरीय एकजुटता को देख सबने,
अपनी भावनाओं को खोया है ..
नैनो में मिली है ऐसी चमक,
की कहना मुश्किल है ,
भीतरी प्रेम और बाहर की जगमगाहट
किसके प्रकाश ने नैनो को धोया है ..
भावनाओं के इस अनूठे संगम ने,
आज आन्नद में डुबोया है।।
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