V

प्रभु की रचना

मानव तु प्रभु की रचना का सुंदरतम श्रृंगार हैं|
सोचा तूने तेरे ऊपर उसका कितना प्यार है||
धरती से आकाश तक है कैसा साथ सजाया,
छ: ॠतुओं का सुंदर मौसम तेरे लिए ही बनाया,
द्रविभूत हो तुझ को सौंपा रत्नों का आगार है,
सोचा तूने तेरे ऊपर उसका कितना प्यार है||
सकल सृष्टि में सर्वश्रेष्ठ है तेरे तन का ढांचा,
प्रभु अपनी संपूर्ण कलाओं से है तुझमें रांचा,
बुद्धि वैभव का भी तुझ में भरा अमित भंडार है,
सोचा तूने तेरे ऊपर उसका कितना प्यार है||
तेरे साथ किए अनुबंधों को ना कभी वह तोड़े,
सांस सांस हर सांस समा के संग संग तेरे दौड़े,
रक्त वाहिनी नलिका में भी उसका ही संचार हैं,
सोचा तूने तेरे ऊपर उसका कितना प्यार है||
रात दिवस निज संबंधों के लिए भले तू डोले,
किंतु जागते सोते बंदे नाम प्रभु का बोले,
संत महापुरुष की तुझे इतनी मात्र पुकार है,
सोचा तूने तेरे ऊपर उसका कितना प्यार है||
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©vikasgarg