----------परछाई ---------
वफा किसी ने वास्तव में अगर निभाई है
तो वो हमारी परछाई है
सब स्वार्थी हैं सब मतलबी
पहचानी है मेने सबकी छवि
कदम से कदम मिलाकर
हर कदम साथ चली है परछाई
माना कभी हाथ न बटा सका
पर साथ रहकर होसला जरूर
बढ़ाई है परछाई
जन्म से साथ है सईया पर भी साथ जलेगा
इतना वफा आखिर कहाँ मिलेगा
यारो का धोका दिल दहलाता है
वक़्त पर अपने भी राह दिखलाता है
अभिमानी इन्सान इंसानियत भूला
रिस्तो को दोलत से तोला
ये काश सभी परछाई सा साथ निभाता
इस व्यंग का दिन ना आता....
__राजीव रंजन _
©dilkiawaz
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