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प्रेम

मौन अगर कह न पाया
तो शब्द नही कह पायेगें।
पढ़ न सके नैनो की भाषा
तो आँसू कैसे पढ़ पायेगें।
धड़कन धड़कन को सुन ले
बस इतनी ही है प्रेम कथा
कानों से सुनकर न कोई
प्रेम इमारत गढ़ पायेगें।
©राम सेवक
©ramsewak