M

" प्रेम "

जहाँ में कितना प्रेम है
चारों ओर ईश्वरीय रैन है
भीतर में कितना चैन है
ये शुद्धता ईश्वर की देन हैं
झपकती पलकों में ,
मासूमियत की लंबी लैन है
आजाद कर अपने भावों को
देखे तो भीतर- बाहर हर ओर
सिर्फ प्रेम है
जो अपेक्षाकृत नहीं
बल्कि निश्छलता की देन हैं!!
©myemotions