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प्रेम मर्म

प्यार अहसास है फक्त!
अहसास को महसूस करो!
बात दृष्टिकोण की है!
दृष्टिकोण को महदूद करो!
प्यार-----------
प्यार अहसास है फक्त!
रिश्तों का मुहताज नहीं!
सँसारों का सँसार है!
सँसार का मुहताज नहीं!
प्यार----------
प्यार अहसास है फक्त!
आँखें जिसे जतलाती हैं!
बात अनुभव की है!
जुबां की मुहताज नहीं!
प्यार--------
प्यार उंचाई है यदि!
प्यार गहराई है कभी!
पारों के पार है!
पारों की मुहताज नहीं!
प्यार-------------
प्यार बूंद है फक्त!
सागर सी बहती है!
सागरों की सागर है!
सागर की मुहताज नहीं!
प्यार----------
प्यार वोह खुशी है!
कि जन्नत भी मिसाल नहीं!
जन्नतों की जन्नत है!
जन्नत की मुहताज नहीं!
प्यार-----------
प्यार वोह बला है जो!
आँखों से शुरु होती है!
पैदा करती है रुह जिसे!
सांसों से खतम होती है!
प्यार---------
©ramvir