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प्रीत की चादर

प्रीत की चादर ओढाकर
दर्द सारा ले गया
इंसान था या था फरिश्ता
खिलता चेहरा दे गया
होते हैं कुछ लोग ऐसे
खुदा का नूर रखते हैं
इंसानियत की राह पर
बुराईयों से दूर रहते हैं
देते हैं लव की हसीं
गम का खजाना लूटकर
और होते हैं मेहरबां
दूसरे का गम देखकर
अपनी करते नहीं परवाह
दूसरों की सुनते सदा आह
जरूरत नहीं दुनियां करे वाह
वो तो बस चलते इंसानियत की राह
जिंदगी इंसान की गर इंसान के न आए काम
किसलिए ये रिश्ते नाते किसलिए ये ताम झाम
इंसानियत का होना यही तकाजा चाहिए
एक दूसरे के सुख दुख में कामाजा चाहिए
©newera