S sochamit en July 23, 2025 परिंदे खुस हैं। परिंदों से पूछो क्या हमारी आवाज़ उन्हें खल रहे हैं।या इन सीत हवाओं में मदहोश होकर वो सवर चुके हैं।इनके मधुर स्वर आजकल कानों में जैसे गूंज सा रहें हो।क्या इन्हे ऐसा तो नहीं लग रहा की लोग इनकी खातिर अब बदल चुके हैं।।©sochamit