"प्रकृति से प्यार निभाते रहना...
उसके अरमान दिल में जगा ते रहना...
वह तुम्हें सवारेगी तुम उसे सजाते रहना...
उससे हर मुलाकात में भीतर की मुस्कुराहट को होठों पर लाते रहना....
वह तुम्हें ज्ञान देगी तुम उसे मुकाम देते रहना...
उसके उपकार के विशाल हृदय का कुछ भाग खुद में संजोते रहना.....
प्रकृति की दुनिया में फैली रोशनी से हर क्षण अपनी झोपड़ी को चमकाते रहना....
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