प्रकृति से जब भी मुलाकात करते हैं....
भीतर से हमारे जज्बात निकलते हैं...
सुलझे- अनसुलझे भाव निकलते हैं...
मुस्कुराहट के चांद चेहरे पर दिखते हैं...
मन के आंगन में फूल बिखरते हैं....
सुकून के मंदिर में दीप जल उठते हैं....
वहां की सुंदरता के चित्र गहराई में छपते हैं....
अनुभव का दौर कुछ इस तरह होता है कि लगता है हम अपना सिर ईश्वर की गोद में रखते हैं.....
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