वो खामोशियों का दम है प्रकृति का आंचल है
कभी खिलखिलाती है मौसमों कभी रुलाती है
वह कभी परिंदों की उड़ान तो कभी सपनों की
उड़ती है चिड़िया की भोजन की तलाश देखा
शाम को लौटना बच्चों की आश घोंसले के पास
प्रकृति कितनी सुंदर आंखों से देख मनमोहक है
वह ख्वाहिशे जो मुझे जिंदा रखें प्रकृति के आंचल
अरंग जीवन समेटे हुए हैं प्रकृति का आंचल समेटे
©lawnishtha
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