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प्रकृति का सानिध्य

प्रकृति का सानिध्य
हवाओं के छुअन से खिल उठता है तन का हर एक रूअन जगत में फैला है हर ओर धुअन हीं धुअन
देख जिसको बहने लगते हैं अश्रुअन
प्रकृति के सानिध्य में ही होता है हृदय का सुअन
यहां शांति में रमता है हमारा मन
मिट जाता है स्मृति से बाहरी हर जन
हो जाता है ईश्वरीय भाव का आगमन !!
प्रकृति का सानिध्य