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प्रकृतिमयता

प्रकृतिमयता
माटी की सोंधी महक ने मोहा मन
और प्रकृति के मनमोहकता में खोया मन
हरी कायनात में बूंदो ने पौधों का डुबोया तन
और मेरे चित्त में भी शातंता का उग आया उपवन
जिसमें मेरे तन का सोया हर कण
और हवाओं का स्पर्श कुछ इस तरह हुआ ,
की जीवंत हो आया मेरी आयु का यह बीतता हुआ क्षण