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"पत्थर की मूरत"

लोग कहते हैं कि भगवान नहीं है
हो सकता है कि यह बात सही है
पर जब भी मुझ पर कोई संकट आया
उनका नाम लेते ही मैंने अपनी मदद के लिए किसी को था पाया
हो सकता है यह बस एक इत्तफाक है
पर मेरे पास भी ऐसे उदाहरण लाख है
माना पत्थर की पूजा करना एक बहुत बड़ी मूर्खता है
फिर कैसे वह पत्थर का भगवान वृंदावन से प्रेम के वश में होकर अंग्रेज के साथ जा सकता है?
माना पत्थर की मूर्ति का भारत से बाहर उड़ कर जाना यह भी बस एक इत्तफाक है पर मेरे पास भी ऐसे उदाहरण लाख
माना जिसको कभी देखा नहीं उसकी पूजा करना बेवकूफी की बात है
फिर क्यों वो रसखान श्याम को देख कर भुला अपनी जात है
हो सकता है जिस कृष्ण को रसखान ने इंसान समझ कर बुलाया वह उसके सामने खड़ा था यह भी बस एक इत्तफाक है
पर मेरे पास भी ऐसे उदाहरण लाख है
माना किसी निर्जीव चीज को ना मानना बहुत समझदारी का काम है
फिर क्यों महलों के सुख को छोड़ वह मीरा उस निर्जीव मूर्ति के पीछे होती रही बदनाम है
शायद मीरा का राणा के वार से हर बार बच जाना और निर्जीव वस्तु में समाना बस एक इत्तफाक है
पर मेरे पास भी ऐसे उदाहरण लाख है
लोग कहते हैं कि मंदिर में पत्थर के भगवान के होते हुए भी अपराध होता है
तब क्या तुम्हारा पाषाण का भगवान सोचने की शक्ति खोता है
जब हजारों साल पहले लिख दिया गया था कि कलयुग की यही जात है
इस कलयुग में किसी अपराध को रोकने में मजबूर कृष्ण के हाथ है
आज भी कोई दिल से पुकारे तो होते चमत्कार साक्षात है शायद ही चमत्कारों का होना भी बस एक इत्तफाक है
पर मेरे पास भी ऐसे उदाहरण लाख है
इस नए युग में दिखावे के लिए उस भगवान को मत भूलो कलयुग संदेह में घुमाता है इसमें संकोच करके मत झूलो एक बार दिल से आंसू बहा कर देखो दिखेगा तुम्हें वह साक्षात है जिसको विश्वास है उसके लिए तो आज भी वह दिनों का नाथ है
शायद यह विश्वास भी बस एक इत्तफाक है
पर मेरे पास भी ऐसे उदाहरण लाख है
मेरे पास भी ऐसे उदाहरण लाख है
-विनिता
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