कब से कितने कत्ल मैं किए जा रहा हुं
ख़ुद पे कितने जुल्म मैं किए जा रहा हुं
सब तो जा ही रहे है मोहब्बत की राह
और मैं हूं की सबसे अलग जा रहा हूं
खैर तुमको मुबारक ये दुनिया ,मोहब्बत
सबको मस्तिष्क से खाली किए जा रहा हु
--------- आशुतोष योगी ---------
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