V

पुण्य शुद्ध धार है 

धर्म का ये युद्ध है 
भावना भी शुद्ध है 
जीत मात्र साध है 
प्रयत्न भी अगाध है 
भले समय रूके यहीं 
ध्वजा कभी झुके नहीं 
घोर मध्य रात में 
प्रलय झंझावात में 
अग्नि ये जली रहे 
ये अतीत की पवित्र 
पुण्य शुद्ध धार है 
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©vikasgarg