बड़े प्यार से कहा थे करते... मेरी तुम हो जान प्रिये,
कंठ-हार, सारा संसार, तुम सुख हेतू अनुष्ठान प्रिये,
पहली दफा हम जब घर आये थे,
तुम चिड़ियों जैसे चहके थे,
पाउडर का डिब्बा पुरा उड़ेल,
बन भूत भी महके थे,
मंगलाचरण में समय लगेगा, कह...
कोर्ट में कागज किये निले,
चलो पापा का खर्चा बच गया,
हाथ करने नहीं पड़े पिले,
फिर मेरी खातीर... बर्तन-कपड़े वाली बाई लगाई थी,
तुम तो काम करते थे अपना, काटती मुझे तन्हाई थी,
फिर एक दिन मैंने पुछा...
जानु! क्या कुछ काम करूं मैं?
दिन-भर टीवी, गैलेरी, गॉसीप से बचने का,
कोई इन्तजाम करूं मैं?
मेरी सोना, मैं हुँ ना.. चिंता फिकर क्यों करती हो,
चिनु, टीना, बबलु, हीना आ जाएगे कुछ दिनो में,
फिर तन्हाई से क्यों डरती हो!
एक प्यारा सा निर्वाण हमारा, गोद में मेरी अब पलता हैं,
पर "मन" मेरे सच कहूं तो, खालीपन अब भी खलता हैं
अब अगर मैं कुछ कहूँ तो,
गुस्सा तुम हो जाते हो,
बात-बात में अब तुम,
मुझे मेरी औकात बताते हो,
कल अजिब ये बात घट गई,
तुमने मुझको थप्पड़ मारा था,
मुझे जताया कौन हो तुम,
मेरा कोई नहीं सहारा था।
©manupandy
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