Y

प्यास

वो पानी सा बेहते चले गए
हम दरकिनार आग में झुलसते रहे
दबे अल्फ़ाज़ बुझाने की बात तो कह गए
आजीवन हम प्यासे तड़पते रहे
वो आग आग ही रही
वो तड़प तड़प ही रही
ज़िंदगी के तो क्या घूंट पीते
हम मौत का गुरूर लिए ही आगे बढ़ते रहे
©yash.more