Y yash.more en July 23, 2025 प्यास वो पानी सा बेहते चले गएहम दरकिनार आग में झुलसते रहेदबे अल्फ़ाज़ बुझाने की बात तो कह गएआजीवन हम प्यासे तड़पते रहेवो आग आग ही रहीवो तड़प तड़प ही रहीज़िंदगी के तो क्या घूंट पीतेहम मौत का गुरूर लिए ही आगे बढ़ते रहे©yash.more