राधा कृष्ण सा प्यार
राधा कृष्ण जैसे है मेरा प्यार
हमेशा दूर और दिल के एकदम पास।
वो तो फिर भी मिलकर बिछड़े थे एक बार,
पर हम तो बिना मिले ही बिछड़ गए कई बार।
बिताया होगा अपना बचपन दोनों ने फिर भी साथ में,
हम तो दूर से बिना कुछ पल बिताए दिल हार गए तेरे प्यार में।
हमारा प्यार नदी के दो किनारों सा है जो ना मिलने के लिए ही बने हैं,
पर एक बहता पानी है जो हमेशा रखता है उन्हें जुड़े हुए।
जुदा होकर भी जुदा नहीं,
और मिलकर भी मिले नहीं,
ऐसा है हमारा प्यार,
अधूरा होकर भी कभी अधूरा नहीं।
और सुनो…
माना कि हम कभी मिले नहीं, शायद कभी मिलेंगे भी नहीं,
पर मेरे दिल के तू सदा पास रहेगा, जाना।
चाहे तेरा जिस्म किसी के भी नाम कर, परवाह नहीं,
पर तेरे दिल पर राज सदा मेरा ही रहेगा, जाना।
तू रुक्मणी किसी को भी बना लेना, जा इजाज़त है,
पर तेरी राधा मैं ही रहूँगी सदा, जाना।
तेरा घर, तेरा परिवार, तेरा संसार चाहे किसी पर भी निसार कर,
पर तेरी आत्मा और रूह में बस नाम मेरा ही रहेगा, जाना।
राधा कृष्ण सा है हमारा प्यार,
दिल से दिल का,
आत्मा से आत्मा का।
ना मिलन की चाह और,
ना बिछड़ने का ग़म का।
तेरी खुशी में खुश और तेरे दुख में दुखी होने का,
बस तेरे हैं और तेरे ही रहेंगे सदा।
तू वादा कर ये प्यार ऐसा ही रहेग सदा,
ना दिल से दूर, ना जिस्म से पास रहने का।
तू वादा कर…
तू वादा कर।
-शिवन्या
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