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राह में कभी....

राह में कभी पत्थर रोड़ा उठा लिया
कोई बात नहीं है
नयी बात यह है कि
तुम्हें आफत आ सकती है
शब्दों की बुनावट में ठेस आ सकती है
तुम तनाव में जाकर कब लौटोगे सोचो
इतनी कसावट में चोट उभरती है
कहीं जाकर हमने वो हटा दिया
आसमाँ साफ लग रहा
राह में कभी मिलोगे शिकायत ना आयेगी
एक बार शिला से टकराया था मैं भी
चोट और घृणा तब आयी उतना ही
उस वेग प्रहार कर गया
तब मौन में जा एक दिन
पौधा तैयार किया
राह में कभी .....
राह में कभी तुम उनको ढूँढ़ना
जो शिला उठाते है .....।
©ravi67