जो तीन लोक स्वामी है निधिवन रास रचाता है ।
जिसे नचाती हैं गोपीं , वह तीनों काल नचाता है।
जिसके सम्मुख नृत्य करें गोपी , जो तीनों लोक चलाता है।
जो प्रेम किए बिना ही सबको निज , पर प्रेम सिखाता है।
जिसे कोई बांध नहीं सकता , वह बंधन में बंध जाता है।
©shivatomar
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