आसमाॅ में बिखरे इन छोटी- छोटी सफेद
बूंदों में है छिपी हजारों बेजूबां कहानियाँ!
देख उन्हें, विचलित मैं... ढुँढती रहती हूँ..
अपनी भी कुछ निशानियाँ..!
न जाने क्या राबता है रातों का
इन झिलमिलाती तारों से..!
बिना इनके जो रह न पाती सुकून से...
हर रात ये आतीं हैं |
लाखों नयी पहेलियाँ साथ ये लाती हैं...
न जाने आज ये किसे ले जाएगी..?
और आसमां के सफर में जोड़ आएगी..!
कभी- कभी सोचा करती हूँ, क्या मेरे ख्वाब मुक्कमल भी कर पाउँगी..?
या फिर केवल हज़ारों के बीच होते हुए भी
किसी एक तारे की तरह मैं भी कहीं खो जाऊँगी..?
इन तारों का क्या है!.
----ये तो हर रोज आती है, तन्हा "रातों" को
सुकून से भर जाती है...
हमारी नहीं तो क्या... किसी और की तो कहानी सुना जाती है :) 💕
📍 साक्षी ❣
©akriti
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