क्यों निराशा है आज हार का, कल तो जीत कर आओगे, बनाये रहो उम्मीदें जीते की, . कल परचम लहराओगे, रात ढलेगी दिन आयेगा, विजय की उम्मीद बनाये रखना होगा, अगली बार रण कुछ और होगा, तीव्र गति से आगे बढ़ना होगा, अब तो सूर्य की तरह तपना होगा, वक्त अपना भी आयेगा, बस उम्मीद बनाये रखना होगा, अगली बार सबकुछ अपना होगा, तीव्र गति से आगे बढ़ना होगा,........
©shivam pal
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