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Republic day

आज़ादी की अटूट कहानी
आएगी फिर भोर सुहानी
क्रूरता की हसरते सुनाता
जलियांवाला बाग़ जुबानी
हर संग्राम की नई थी गाथा
कही आंदोलन कही तमाशा
इंक़लाब के गूंजे जयकारे
आँखों में है जलते अंगारे
अथक परिश्रम किया था सबने
आजाद हिन्द का सपना है जिसमे
विद्रोह की ये जंग थी ऐसी
तान के सीना चढ़ गए सूली
अंत समय में चलाई थी गोली
गैरत दुश्मन की मंजूर नहीं थी
रक्त का हर जर्रा मेरा
स्वराज की नयी मंजिल लाया है
गौरव के तराने बजे है
नव भारत के प्रवेश सजे है
फूलो भरी हर बगिया होगी
चहक रही हर चिड़िया होगी
उत्तर हिमालय प्रबल बढ़ाता
दक्षिण सागर गुणगान सुनाता
लोकतंत्र है सशक्त बनाए
भारत की है नीव चढ़ाए
बोली - वेश अनेक यहाँ है
भारत जैसा देश कहाँ है
✍️ Drashti Sharma 🇮🇳
©drashti