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रहते है अब खौफ मे तेरी निगह-ए-अदा से हम।

रहते है अब खौफ में तेरी निगाह-ए-अदा से हम
तंग आ गए है तेरे दिए हुए सजा से हम।
करना है जुल्म हमपे जितना तुम अभी कर लो
शिकायत तेरी जफाओं का करेंगे जरूर खुदा से हम।
इतना तो नहीं कभी कोई तड़पाता अदू को भी
क्यूं दुहराए मुहब्बत की गलती उस बेवफा से हम।
मेरे दिल को वो फकत इक खिलौना समझ के रखा
जग जित लिया मगर क्यूं मात खा गए एक बला से हम।
हाल-ए-दिल छुपाते है मगर इसका अब क्या करे
आ गए है सब की नजर मे बस इक मुब्तिला से हम।
देखें तो पहले कौन हटता है इस मुहब्बत की राह से
अनुराग शर्त बांध कर बैठे है उस बाबस्ता से हम।
©anuragrahi