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रंग-भेद

रंग - बिरंगी दुनिया में रंगों का ही भेद है,
रंगों के इस भेद से किसी को ना खेद है,
रंगों का यह भेद किसने बनाया,
किसने मानव हृदय मर्म पर ये बीज उपजाया?
किसने कहा गौर वर्ण है सरूप?
किसने कहा श्याम वर्ण है कुरुप?
श्याम वर्ण कुरूप है तो क्यों पसंद है काले बाल?
गौर वर्ण पसंद है तो क्यों नापसंद है सफेद बाल?
गौर वर्ण पसंद है तो क्यों पसंद है काले नयन?
गौर वर्ण होगा पर दिल काला होगा तो क्या करोगे?
गौर वर्ण होगा पर कर्म काले होगें तो क्या करोगे?
गौर वर्ण होगा पर विचार काले होगें तो क्या करोगे?
तन गौरा और मन काला होगा तो क्या करोगे?
अरे! भारतीय संस्कृति ने बाह्य रंग रूप नहीं देखा,
भारत संस्कृति ने अंतर हृदय को है देखा,
कर्म का पाठ पढ़ाने वाले श्री कृष्ण का वर्ण भी श्याम था,
मर्यादा का जीवन सिखाने वाले श्रीराम का वर्ण भी श्याम था,
आज प्यार आंखों से शुरू होकर दिल तक जाता है,
प्यार तो वो है जो दिल से शुरू हो,
फिर चाहे बाद में आंखों तक पहुँच जाए।
विकास गर्ग
©vicky