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रूबरू जनाब ओलिया।

मेरीअक्ल-ए-होश की असाईसे,
हमने सांचे जुनूं में ढाल दी,
हमने कर लिया था अहद-ए-तर्क-ए-इश्क,
तुने फिर बांहें गले में डाल दी।
©anuragrahi