V

रूह

हर रूह को रहती है एक अजीब सी बैचनी हर वक्त,
शायद कोई तबाही का सामान ढूंढ रह हैं हम सब,
माँ कभी बेवकूफ नही होती,समझो नादानों
सारी बातें समझती थी लब खुलते नही थे जब,
जो कर रहा था कुछ देर पहले तक सलीके से बातें,
देखते ही किसी फकीर को बेवकूफ हो गया बेअदब,
कभी ना लबों पर काम की खातिर कल आना चाहिये,
हमेशा यही प्रयास रहे,कि हां ,करता हूँ आज, अब,
कृपा रहती है हमेशा माँ शारदा की विकास पर,
भर दिया है उसने मेरी रूह को नये ख्यालों से लबालब
🌹🌹🌹
©vikasgarg