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साज़िश

कभी सोचूंगा तो बताऊंगा
रचनाकार कोन है इस साज़िश का
जो रची जा रही है
जो नचाए जा रही मुझे
कभी सोचूंगा तो बताऊंगा
मदारी कोन है
या अंदर ही रची जा रही है
ये साज़िश
जो हवाओं को बवंडर बताए जा रही है
शायद अंदर ही पनप रही है
इस खेल को ही साजिश बता रही है
कभी सोचूंगा तो बताऊंगा
फिलहाल गली कोई और है
दायरा भी साज़िश का नहीं
जाना होगा शायद कभी
ढूंडना होगा
रचनाकार कोन है अगर कोई है
कभी सोचूंगा तो बताऊंगा
©yash.more