A

साथ

एक एक कर साथ छोड़ते गए
जो दम भरते थे यारी का कसमें जो खाते थे
उम्र भर साथ देने का
एक ज़रा वक़्त क्या बदला उन्होंने तो वक़्त से
ज़्यादा तेज़ अपना है रंग बदला
#शायरांश
©anraaz