चुनरिया भिंगी रे रिमझिम बदरीया,
चुनरिया भिंगी रे मोरी बदरीया।
कैसे जाऊं मैं पिय के नगरीया,
चुनरिया भिंगी रे रिमझिम बदरीया।
दिल में तड़प अब मिलन की समाए,
देखें बिना एक पल रहा नहीं जाए।
निकलीं हूँ घर से अकेली दिन दुपहरीया,
चुनरिया भिंगी रे रिमझिम बदरीया।
पहले पहल खुद बलम के घर को चलीं हूँ,
अपने पिय की एक कोमल कली हूँ।
नाजुक उमर मेरी भूल गई मैं डगरीया,
चुनरिया भिंगी रे मेरी रिमझिम बदरीया।
बालम घर मोरा कोठा आमारी,
मोटर गाड़ी है सभी सवारी।,
किनसे मैं भेंजू उनको खबरीया,
चुनरिया भिंगी रे रिमझिम बदरीया।
चुनरिया भिंगी रे मोरी।
©anuragrahi
S