V

सौन्दर्य

नैनीताल के इक ताल में दिखा इक दलदल,
दलदल के अन्दर खिला था सुन्दर कमल,
खुशबू पाने के लिए तोड़ने लगा था फूल,
आवाज आई, रुक जाओ Mr. Cool,
खुशबू पाने की खातिर क्यों लेते हो मेरे प्राण,
तोड़ने के बाद क्या फिर से डाल सकोगे मुझमें जान,
तोड़ोगे मुझको, आएगी दो दिन बाद मुझसे बदबू,
डाल संग रहकर, फैलाता रहूंगा कई दिनों तक खुशबू,
सुनकर कमल की बात, मन गया पिघल,
प्रण लिया, अब कभी ना तोड़ुंगा कमल,
आज कुदरत ने मुझे दे दिया अमूल्य ज्ञान,
वृक्ष, वनस्पति, पौधों में भी होते हैं प्राण,
विकास गर्ग
©vicky