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सब्र

यह मेरा सब्र है कि मैं घर से निकलता ही नहीं
तुम यह ना समझना कि मैं चलता ही नहीं
एक आग है इश्क़ की, जो लगी हुई है अरसे से
उस आग में मगर मैं जलता ही नहीं . . .
©dheer.j