नहीं हम दुःशासन, नहीं हम दुर्योधन।
मन में बसा योग प्रेम, सो देखना चाहें तुम्हारा तन।
देखना चाहते तुम्हारा तन कोमलांगी सुन्दर नारी।
कहाँ जाकर गायब पुरानी तुम्हारी काया भरकम भारी।।
काया भारी भरकम हुई योग से गायब कैसे।
हम तो आज तक ना कर पाये डॉक्टर को खिलाके पैसे।।
खिला कर पैसे उल्टा शरीर गया फूल।
सच में योग नहीं करना मानव की सबसे बड़ी भूल।।
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©vikasgarg
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