झूठे लोगों का साथ देती है दुनिया
क्योकि उन्हें उस वक्त उसमे अपनापन नज़र आता है
सच का साथ नही देता कोई क्योकि वह कड़वा होता है
शायद इसीलिये सच हमेशा कही दूर खड़ा होकर बेहताशा रोता है
सच को भी अपनी कीमत सब कुछ गवाकर मालूम होती है
जिनका सच से साथ छूट गया होता है झूठ उसे भी अपनाने लगता है
जो सच से अलग हो गये होते है उन्हें लगता है की कोई उन्हें अपना रहा है
पर सच तो ये है की उन्हें झूठ ही प्यार लगता है
ना आये यकीन मेरी इस बात का तो आजमालो
किसी शत्रु से झूठ बोल कर आप उसे अपना मित्र बना लोगे
और वही दूसरी तरफ
किसी अपने को आप सच बोलकर अपनी ही जान का शत्रु बना लोगे
©deepakshar
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