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सच्चा प्यार

सच्चा प्यार

ऐसा प्यार कोई प्यार नहीं होता जिसका कभी इज़हार नहीं होता,

लब खामोश रहते हैं, आशिक कभी बेकरार नहीं होता।

इश्क़ में बिन कहे भी, सब कुछ कह जाती है नज़रे,

जो सच्चा प्यार होता है, उसमें कोई व्यापार नहीं होता।

माशूका को देखे बिन अगर, दिल बेखबर सा धड़कता जाए,

वो लम्हा वीरान होता है, वो दिल गुलजार नहीं होता।

प्यार आशिक की साँसों में बसा हो, बिन लबों से इज़हार किए,

खुदगर्ज आशिक होता है, वो मोहब्बत का हकदार नहीं होता।

© विशाल सैनी

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