हमने सोचा के क्यों ना ख़ामोशी का रुख इख़्तियार करें, क्या जरुरी है के हर फैसला तलवार करें, हक़ के लिये लड़े, और हद मे भी रहें, अपने दायरे को हमने ना दीवार बनने दी, अपनी आवाज को ही हमने हथियार बना ली, क़ौम की मुहब्बत ने इंकलाब जगा दिया, बेघर होने के खौफ ने" शाहीनबाग़"बना दिया, "शाहीनबाग़" से हम सबकी नजरों मे आ गए, अपनी सादगी से हम पूरी दुनिया को भा गए, हम सड़कों पर अपना " संविधान" बचाने आये है, सारे जहाँ से अच्छा "हिंदुस्तान " बचाने आये है, हमारी मज़बूरी को समझो ना बुलाओ हमें" गद्दार " रहने दें हमारे सर पर दस्तार बरकरार #selfwritten@kajalfirdaus
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