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शायरी स्वरचित

ये कैसा समाज है भाई
जिसमे कितने गढ़े है और कितनी है खाई,
वहां किसी ने तलाक की अर्जी लगाई,
और यहां है किसी की गोदभराई ।
बेरोज़गारी है सर पे फिर भी चाहिए कपड़ो में सफाई,
चार दिन की जिंदगी और 8 गुना महँगाई,
शाम को अचानक से जो लड़की पसंद थी आई,
उसने बोला प्यार होगा मोबाइल पे और ताज होटल में होगी सगाई|
चलिए अपना अपना काम हो गया तो करे इस आत्मा को विदाई
मतलब निकल गया है तो एक रुपये की भी मिलती नहीं है मिठाई,
कुछ भी नही कर सकती तब मोटी से मोटी रजाई
जब अंदर तक कांप जाते है जो ठंड देती है किसी की बेवफाई।
©hayar