उसे बड़ा शौक है मुझे बर्बाद करने का,
उसे बड़ा शौक है मुझे बर्बाद करने का,
जिसने कभी थामा था हाथ मेरा,
कि मुझे आबाद रख सके।।
दुनिया की तिरछी नज़रों से बचा सके,
मुझे महफूज़ रख सके,
हर ग़म हर आंसू को खुद में समेट सके,
मेरे अंधेरों को अपने उजालों से भर सके,
आज वही मुझे अकेलेपन का एहसास करा,
मुझे मिटाने चला,
मेरा तमाशा खुद ही बनाने चला,
चलो कोई तो है जो मुझे फिर से दर्पण दिखाने चला,
शिद्दत से मेरे वजूद को मिटाने चला,
मेरे गुरूर को निस्तनाबुत कर,
चूर - चूर कर मिटाने चला,
आज वो मुझे बर्बादी की कागार पर,
खुद से पहुंचाने चला।।
©nishabd
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