S

shayri

गुलाब की खुशबू से तन महक जाता है।
गुलाब की खुश्बू से तन महक जाता है।
प्रेम क्या चीज़ है जालिम मन का हर कोना महक जाता है।
भुजती नही ये आग। भुजाने से, उठता चिंगारी से लावा सा दहक जाता है।
बहुत शातिर है दिल बस बातों में बहक जाता है।
©shivatomar