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शेर

उल्फत को चाहिए कि बेपनाह हो जाए।
कोई हमको रोको हमसे ना ये गुनाह हो जाए।।
खामियाजा भुगतेंगे किसी रोज़ इस हसरत का।
तुम मुस्करा दो तो यही हमारी सज़ा हो जाए।।
©yash.more