B balanath en July 23, 2025 शेर अगर फ़ुर्सत मिले तो मेरी तहरीरो को पढ़ लेना तुम!मैने जब भी कुछ लिखा है ग़म-ए-हयात लिखा है!!一 बालानाथ राय©balanath