वह वीर पुत्र हुआ जिसका जन्म
इस पावन देश की माटी में..
भगत सिंह है नाम वीर का
हुआ शहीद झूलकर फांसी में.
गांधी का वह भक्त बना ओर
दौड़ा असहयोग की झांकी में..
पर टूटा उस नन्हे वीर का सपना
जब धूमिल हुई क्रांति माटी में..
करतार सिंह को आदर्श मान कर
चला स्वतंत्र वो देश को करने...
उखाड़ अंग्रेजों की जंजीरें
भर उत्साह वो अपने में...
इन्कलाब का नारा लेकर
विस्मिल आज़ाद भी साथ हुए...
क्रांति विचारो के प्रचार को
सुखदेव राजगुरु भी साथ दिए...
गोरे साइमन के विरोध में
लालाजी के साथ चले..
पर सांडर्स की लाठी ने
लालाजी के प्राण लिए..
हुआ क्षुब्ध देश इस घटना से
भगत को बदला लेना था...
मार दिया फिर उस गोरे को
श्रद्धांजलि लालाजी को जो देना था...
पर आज़ादी की लड़ाई में
जनता का ना साथ मिला...
तब फिर असेम्बली में बम
फेकने का मन वह बना लिया...
फेका बम खाली कुर्सी पर
दत्त ने भी साथ दिया....
गिरफ्तारी देकर वो अपने का
संदेश देश को बता दिया...
फिर चला सम्मेलनों का दौर
गांधी इरविन बात किए...
पर गांधी की थी क्या मजबूरी
फांसी टालने तक की वो बात ना किए..
आ गया वो दिन फांसी का
जनता में आक्रोश बढ़ा...
फांसी देने की तारीख़ के
पहले ही फांसी तय हुआ...
चला जेलर उस वीर को लेने
फांसी चढ़ाने को तत्पर था...
इक क्रांतिकारी था वो भगत
जो इक क्रांतिकारी लेलिन को पढ़ रहा था..
आखिरी पन्ना भी ना पढ़ पाया
कहा जेलर अब भगवान को याद करो.
पर भगत ना था वो बुजदिल
जो मरते वक्त भगवान को याद करे..
साथियों से गले मिलने की
अंतिम इच्छा पूरी हुई..
देख चूमता निडर फांसी को
जल्लाद की रूह भी कांप गई...
चढ़ गया वो देशभक्त फांसी को
दे गया सबको एक संदेश..
कुचल सकता है कोई आदमी को
पर नहीं दबेगा उसके विचार ओर सोच.
थे वो शहीद ए आजम
जो करोड़ों युवा को प्रेरित किए...
मां भारती के आज़ादी के खातिर
खुद को इस माटी में न्योछावर किए...
उनके क्रांतिकारी विचारो ने
नेताजी को भी प्रभावित किए...
थे वीर वो भगत सिंह
जो आज़ादी के मार्ग खोल दिए..
वह वीर पुत्र हुआ जिनका जन्म
इस पावन देश की माटी में...
भगत सिंह है नाम वीर का
हुआ शहीद झुल कर फांसी में....
*निशांत*
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