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शहीद की माँ

घाव बहुत गहरा है , चारो ओर अँधेरा है || जो मेरा था , आज वो तेरा है ||मेरे खून का कतरा बहा है ,पुत्र का दर्द एक माँ ने सहा है ||जान होकर भी बेजान हूँ, मैं पेड़ हूँ न की पान हूँ||उसके जाने का गम है ,मेरे लिए वो सूरज से न कम है ||मेरी वो जान है ,मेरी वो पहचान है|| वो मेरा सपना था ,वो मेरा अपना था|| उसके सीने पर लगी हर एक गोली कह रही है ,माँ धरती माँ की खातिर ही गम सह रही है ||तेरी सूरत मैं निहार रही हूँ, पुत्र आज मैं तेरे सामने हार रही हूँ|| कहाँ गया तेरा वो वादा लोट कर आऊंगा; तेरे हाथो से लड्डू खाऊंगा ||मेहंदी भी रचानी है ,बहिन की डोली भी उठानी है ||तेरा वादा वादा रह गया, समय से पहले क्यों अलविदा कह गया|| मैं तेरी याद में रो कर भी जी लूँगी ,हर एक कड़वे घूंट को भी पी लूंगी|| समय मिले तो माँ का हाल जानने आना, माँ ने तो तुझे ही जीवन माना ||तेरी याद में दीप जलाऊँगी ,वीरान बाग़ में फूल खिलाऊंगी ||पुत्र मेरी नजर तेरे दीदार के लिए तरसेगी, आँखों से नदी हर त्यौहार बरसेगी ॥॥
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