B

।शिकायत।

हवा में उड़ते मेरे बाल । कोई काटे मेरी भूजाए
कोई। उतारे मेरी खाल।मैं भी
एक जीव हू। जीस पर निर्भर है पूरा संसार।
छाया देता हू हर एक को ।सब खाते मिठठे मेरे फल
पर कोई न देता मुझे जल पागल मनुष्य ये न जाने
मूझी से इनका आने वाला कल
शिकायत करता हू हर एक से जो मेरे
इस कर्म को न देखते ।।मै अगर स्वच्छ
वायु न देता क्या ये पूरा संसार देखते
मेरे फल के मैवो से तू अपना शरीर
बना ।पर एक बार न खाली बैठ
मेरा {शुक्र} मनाया
हवा में उड़ते मेरे बाल । कोई काटे मेरी भूजाए
कोई। उतारे मेरी खाल।मैं भी
एक जीव हू। जीस पर निर्भर है पूरा संसार।
छाया देता हू हर एक को ।सब खाते मिठठे मेरे फल
पर कोई न देता मुझे जल पागल मनुष्य ये न जाने
मूझी से इनका आने वाला कल
शिकायत करता हू हर एक से जो मेरे
इस कर्म को न देखते ।।मै अगर स्वच्छ
वायु न देता क्या ये पूरा संसार देखते
मेरे फल के मैवो से तू अपना शरीर
बना ।पर एक बार न खाली बैठ
मेरा {शुक्र} मनाया
Bobby silwaniya
©Bobby ind