यहां हर किसी को शिकायत है कि मैं शिकायत करूं,
यही शिकायत है कि शिकायत किसको करूं ,
पहली शिकायत खुद से ही कि मैं शिकायत करता हूं,
शिकायत करता हूं तो शिकायत सुनने से क्यों डरता हूं,
दूसरी शिकायत मां मैं तेरे से करता हूं,
मां! मुझको इतना प्यार मत कर,
तेरा प्यार वापस करने से डरता हूं,
तीसरी शिकायत में मेरे पिता से करता हूं,
हाथ थाम कर चलना मुझको सिखाया,
लगी ठोकर तो आपने उठाया,
क्या मैं आपको आगे ले जा सकता हूं?
क्या मैं नाम आपका रोशन कर सकता हूं?
चौथी शिकायत मुझको मेरे गुरु से है,
जिन्होंने लुटाया मुझ पर ज्ञान का भंडार,
मुझको सिखलाया जीवन का सार,
क्या मैं भी दुनिया को सिखला पाऊंगा?
क्या मैं भी ज्ञान का रक्षक कहला पाऊंगा?
पांचवी शिकायत करता हूं मैं भगवान से,
जिसने हर पल मुझको शैतान से बचाया,
भगवान तूने तो मुझको सिर्फ दिया है,
कभी ना मुझसे कुछ लिया है,
क्या मैं भी तुझको कुछ दे पाऊंगा?
🌹विकास गर्ग🌹
©vicky
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